सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

महर्षि चरक एवं चरक संहिता-18- अध्याय २-वमन कारक द्रव्य

गतांक से आगे...........
मदनं मधुकं निम्बं जिमूतं कृतवेधनं.
पिपलीकूटजेक्ष्वाकूणयेला धामार्गवाणी (७)
उपस्थिते श्लेषमपित्ते व्याधावामाशयाश्रये
वमनार्थम प्रत्यंजीत भीषग्देहमदुषयम (८)
वमन कारक द्रव्य- मदन (मैन फल), मधुक (मुलैठी) निम्ब (नीम), जीमूत (कडुई, तुरई, देवदाली), कृत्वेधन (तोरई) पीप्प्ली (पिपली), कूताज (कूड़ा ,इन्द्रजौ) इक्ष्वाकु ( कडुआ तुम्बा), एला ( बड़ी इलायची), धामागर्व (कडुई तुरई) इन औषधियों  अमाशय में श्लेषपित्त की व्याधि हो, तब वैद्य इस प्रकार करे कि देह में व्याधि उत्पन्न ना हो.
जारी है................

1 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari on 26 अक्तूबर 2009 को 8:30 pm ने कहा…

अच्छी जानकारी, जारी रहिये.

 

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